जय श्री कृष्णा
मंगलवार, 5 दिसंबर 2017
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भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च । अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥
. मैं ही 'उत्पत्ति', मैं ही 'स्थिति' और मैं ही 'प्रलय' हूँ !!! भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च । अहङ्कार ...
(शीर्षकहीन)
जय श्री कृष्णा
*आमदनी पर्याप्त न हो तब..
*आमदनी पर्याप्त न हो तब खर्चो में नियंत्रण रखना चाहिए।* *जानकारी पर्याप्त न हो तब शब्दों में नियंत्रण रखना चाहिए।* जय...
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